सब कुछ हो फिर भी सब न हो

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जो अब तक होता आया
वो शायद अब न हो
ज़िन्दगी के लम्बे सफ़र में
दुःख भरी कोई शब् न हो

बचपना है प्यार है
यारी है दोस्ती है
हंसी है ख़ुशी है
उम्मीदें है ख्वाहिशें हैं

सपनो के टूटने पर
उम्मीदों के छूटने पर
उतना दर्द
शायद अब न हो

एक रास्ता था वो भी
एक रास्ता है ये भी
उस राह के छूटने पर
अकेलापन शायद अब न हो


नयी मंजिलों का इंतज़ार है
नयी राहों से मुझे प्यार है
इन राहों पर मिलने वाली मंजिलों में
सब कुछ हो
फिर भी सब न हो


प्रशांत भारद्वाज

अप्रैल २००९

Comments

18 responses to “सब कुछ हो फिर भी सब न हो”

  1. Vaishali Avatar
    Vaishali
  2. Jas Bhambra Avatar
    Jas Bhambra
  3. joy :) Avatar
    joy 🙂
  4. Rhapsody Avatar
    Rhapsody
  5. joy :) Avatar
    joy 🙂
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