Category: Works

  • ज्ञानचंद दोहेवाले

    पोथी पड़ पड़ जग मुआ पंडित भया न कोई
    लेटेस्ट सेल्फ-हेल्प बुक पड़े सो पंडित होए ॥

  • नया साल

    नए साल में सोच रहा हूँ के पैसा नहीं समय कमाऊंगा !
    दो चार दिन खाली बैठूं , पर जहाँ दिल लगे वहाँ वक़्त बिताउंगा।

    कभी आसमां देखूंगा और कभी तारे गिनते गिनते सो जाउंगा
    कभी बारिश हो रही होगी तो पानी में भीगने से नहीं शरमाउंगा।

  • Just Like that…

    मेरे हाथों से आती तेरी खुश्बू से तेरे होने का एहसास होता है…
    तेरे संग बिताया एक लम्हा बाकी सब लम्हों से ख़ास होता है ।

  • Just Sayin….

    Live your life like a game…

    If there is no next level, you are not probably moving ahead!

  • रोज़ी रोटी

    कल वो खाते थे , आज ये खाते हैं .. ज़्यादातर लोग बस येही गाना गाते हैं

    सुबह से शुरू होता है ये किस्सा, रात तक खा पीकर सो जाते हैं
    पर ये सोचिये के ये साले भ्रष्ट नेता हमारे ही चुनाव से आते हैं
    वोटिंग के दिन छुट्टी मनाकर और उसके बाद हर रोज़ नेताओं को गालियाँ खिलाकर
    आप और हम आखिर क्या पाते हैं?
    क्या इस-से नेता सुधर जाते हैं?
    या फिर हम आगे बड़ जाते हैं ?
    फिर रात होगी फिर सब सो जायेंगे। सुबह उठ कर फिर वही कार्यक्रम अपनाएंगे
    अखबार पड़ेंगे समाचार देखेंगे और नेताओं को गालियाँ सुनायेंगे
    फिर अपनी रोज़ी रोटी के चक्कर में सब भूल जायेंगे!
  • देश प्रेम

    तिरंगा झंडा देख कर ये ख्याल आता है

    के ये ख्याल कभी कभी ही क्यों आता है

    साल भर ये देश प्रेम कहाँ चला जाता है

    और एक छोटे से बदल की तरह दो-चार दिन की बारिश कर गायब हो जाता है

    देश प्रेम है, दवाई नहीं, जो दिन में दो बार ली जाये

    देश प्रेम है, मिठाई नहीं, जो हफ्ते में एक बार खाई जाये

  • बारिश

    आज बारिश ने आने की कोशिश तो की थी

    शाम में मौसम ने रिम्झिमाने की कोशिश तो की थी

     
    दो चार बूदें और बस फिर कुछ नहीं 
    थोडा और रुक जाओ, हमने समझाने की कोशिश तो की थी 
  • काला

    तन काला है, मन काला है
    बुढ़ापा जवानी बचपन काला है

    दिन के बाद आती रात काली है
    कभी कभी तो रात के बाद का दिन काला है

    सुन्दरता का प्रतिरूप दिखाता, ये निर्मल योवन काला है

    भय काला है, हँसी काली है,
    काली अँधेरी रात में आने वाला स्वप्न काला है

    ये आम आदमी काला है, ये हमारी सरकार काली है
    ये सड़क पर भीख मांगता भिकारी काला है, वो गोदाम में काला बाजारी करता व्यापार काला है

    परचा काला है, स्याही काली है
    साक्षरता और शिक्षा का बाज़ार काला है

    सिर्फ नकली लेप से पुते चेहरों पर बची कुछ लाली है
    नहीं तो भाई साहब, यहाँ तो पूरी की पूरी दाल काली है

  • Just saying….

    Easier said than done!

     

    Better done than said!!!!

  • ज्ञानचंद दोहेवाले

    मन में बात न छुपाइये, मन हो जाता भारी |

    दोस्तों से मिलिए, दिल से बोलिए, छोड़िये चिंता सारी ||