तुझ को दिल में रख कर
सूरज के काटे चक्कर
फेरे पड़ चुके है
शादी हो गयी है
अर्धांगिनी कहने में तुझ को
कोई हर्ज़ नहीं है
तेरी वजह से जान मेरी
आधी हो गयी है – धुर्जटा
तुझ को दिल में रख कर
सूरज के काटे चक्कर
फेरे पड़ चुके है
शादी हो गयी है
अर्धांगिनी कहने में तुझ को
कोई हर्ज़ नहीं है
तेरी वजह से जान मेरी
आधी हो गयी है – धुर्जटा
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